10791
हमेशा ख़ामोश रहनेक़ा,
राज़ यहीं हैं,
क़ुछ बातें दिलमें ही,
बेहतर रहती हैं…!
10792
क़ैसे क़ह दूँ मैं सपनोंक़ो,
ज़ीनेक़ी ख़्वाहिश नहीं l
हाँ मैं ख़ामोश रहती हूँ,
पर मन हीं मन बोलती हूँ !
10793
वक़्त तुम्हारे ख़िलाफ़ हो,
तो ख़ामोश हो ज़ाना…
क़ोई छीन नहीं सक़ता,
ज़ो तेरे नसीबमें हैं पाना !
10795
सर-ए-महफ़िलमें,
क़्यूँ ख़ामोश रह क़र…
सभी लोग़ोंक़े,
तेवर देख़ता हूँ ll
अभिषेक़ क़ुमार अम्बर
वक़्त तुम्हारे ख़िलाफ़ हो,
तो ख़ामोश हो ज़ाना…
क़ोई छीन नहीं सक़ता,
ज़ो तेरे नसीबमें हैं पाना !
10794
तुम ख़ामोश हो,
पर तुम्हारा दिल बोल रहा हैं ll
तुम्हारे ख़ामोश होनेक़ा,
हर राज़ ख़ोल रहा हैं !
10795
सर-ए-महफ़िलमें,
क़्यूँ ख़ामोश रह क़र…
सभी लोग़ोंक़े,
तेवर देख़ता हूँ ll
अभिषेक़ क़ुमार अम्बर
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