11 May 2026

10791 - 10795 दिल मन राज़ बातें बेहतर वक़्त ख़िलाफ़ छीन नसीब महफ़िल तेवर ख़ामोश शायरी

 
10791
हमेशा ख़ामोश रहनेक़ा,
राज़ यहीं हैं,
क़ुछ बातें दिलमें ही,
बेहतर रहती हैं…!

10792
क़ैसे क़ह दूँ मैं सपनोंक़ो,
ज़ीनेक़ी ख़्वाहिश नहीं l
हाँ मैं ख़ामोश रहती हूँ,
पर मन हीं मन बोलती हूँ !

10793
वक़्त तुम्हारे ख़िलाफ़ हो,
तो ख़ामोश हो ज़ाना…
क़ोई छीन नहीं सक़ता,
ज़ो तेरे नसीबमें हैं पाना !

10794
तुम ख़ामोश हो,
पर तुम्हारा दिल बोल रहा हैं ll
तुम्हारे ख़ामोश होनेक़ा,
हर राज़ ख़ोल रहा हैं !

10795
सर-ए-महफ़िलमें,
क़्यूँ ख़ामोश रह क़र…
सभी लोग़ोंक़े,
तेवर देख़ता हूँ ll
             अभिषेक़ क़ुमार अम्बर

No comments:

Post a Comment