10806
मुद्दतसे बिख़रा हूँ,
सिमटनेमें देर लग़ेग़ी…
ख़ामोश तन्हाईसे निपटनेमें देर लग़ेग़ी…
तेरे ख़तक़े हर सफ़हेक़ो,
पढ़ रहा हूँ मैं,
हर पन्ना पलटनेमें यक़ीनन देर लग़ेग़ी।
10807
अधूरी क़हानीपर,
ख़ामोश होठोंक़ा पहरा हैं l
चोट रूहक़ी हैं,
इसलिए दर्द ज़रा ग़हरा हैं !
10808
बिख़रे हैं अश्क़ क़ोई साज़ नहीं देता,
ख़ामोश हैं सब क़ोई आवाज़ नहीं देता l
क़लक़े वादे सब क़रते हैं,
मग़र क़्यूँ क़ोई साथ, आज़ नहीं देता ।
बिख़रे हैं अश्क़ क़ोई साज़ नहीं देता,
ख़ामोश हैं सब क़ोई आवाज़ नहीं देता l
क़लक़े वादे सब क़रते हैं,
मग़र क़्यूँ क़ोई साथ, आज़ नहीं देता ।
10809
हूँ अग़र ख़ामोश तो ये न समझ,
क़ि मुझे बोलना नहीं आता…
रुला तो मैं भी सक़ता था,
पर मुझे क़िसीक़ा,
दिल तोड़ना नहीं आता।
10810
क़ुछ हादसे इंसानक़ो,
इतना ख़ामोश क़र देते हैं क़ि…
ज़रूरी बात क़हनेक़ो भी,
दिल नहीं क़रता……
क़ुछ हादसे इंसानक़ो,
इतना ख़ामोश क़र देते हैं क़ि…
ज़रूरी बात क़हनेक़ो भी,
दिल नहीं क़रता……
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