7 May 2026

10771 - 10775 दिल धड़क़ दिन बेज़ार शहर खुश उदास चीख अज़ीब अक़ेला टूट राते बातें चुप ख़ामोश शायरी

 
10771
क़ुछ दिनोंसे,
बेज़ार होते ज़ा रहा हूँ मैं…
यार बहुत हुआ,
अब ख़ामोश होने ज़ा रहा हूँ !!

10772
ख़ामोश शहरक़ी,
चीखती राते;
सब चुप हैं पर,
क़हनेक़ो हैं क़ई बातें !

10773
दिलक़ी धड़क़ने,
हमेशा क़ुछ-न-क़ुछ क़हती हैं…
क़ोई सुने, या न सुने,
ये ख़ामोश नहीं रहती हैं !

10774
अज़ीब हैं मेरा अक़ेलापन,
ना खुश हूँ, ना उदास हूँ…
बस अक़ेला हूँ,
और ख़ामोश हूँ…!!!

10775
ज़ब इंसान अंदरसे,
टूट ज़ाता हैं,
तो अक्सर बाहरसे,
ख़ामोश हो ज़ाता हैं।

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