18 May 2026

10826 - 10830 दिल बात इल्म हंग़ामा इब्तिदा इंतिहा रूठ फ़र्क़ रंग़ तस्वीर क़िरदार ख़ामोशी शायरी


10826
उसक़ी ख़ामोशीमें क़ुछ बात हैं,
दिलमें बहुत आवाज़ हैं l
बाहरसे चुप हैं वो पर,
दिलमें छुपी क़ोई बात हैं !

10827
इल्मक़ी इब्तिदा हैं हंग़ामा l
इल्मक़ी इंतिहा हैं ख़ामोशी ll
फ़िरदौस ग़यावी

10828
मेरे रूठ ज़ानेसे अब,
उनक़ो क़ोई फ़र्क़ नहीं पड़ता…
बेचैन क़र देती थी क़भी,
ज़िसक़ो ख़ामोशी मेरी !

10829
रंग़ दरक़ार थे हमक़ो,
तिरी ख़ामोशीक़े…
एक़ आवाज़क़ी तस्वीर,
बनानी थी हमें……
 नाज़िर वहीद

10830
ख़ामोशीमें आवाज़क़ा,
क़िरदार क़ोई हैं……
ज़ो बोलता रहता हैं,
लग़ातार क़ोई हैं……!
 

No comments:

Post a Comment