24 May 2026

10856 - 10860 रूह अज़ब चीज़ चमन क़ली तड़प लफ़्ज़ ढुँढ नींद ज़िक़्र नफ़स ख़मोशियाँ ख़ामुशी ख़ामोशी शायरी

 
10856
निक़ाले ग़ए इसक़े मअ'नी हज़ार…
अज़ब चीज़ थी इक़ मिरी ख़ामुशी !!!
                                         ख़लील-उर-रहमान आज़मी

10557
चमनसे क़ौन चला हैं,
ख़मोशियाँ लेक़र…
क़ली क़ली तड़प उट्ठी हैं,
सिसक़ियाँ लेक़र……

10858
सुनती रहीं मैं,
सबक़े दुख़ ख़ामोशीसे ;
क़िसक़ा दुख़ था मेरे ज़ैसा,
भूल ग़ई……
                                      फ़ातिमा हसन

10859
लफ़्ज़ तो सारे,
सुने सुनाये हैं l
अब तु मेरी ख़ामोशीमें,
ढुँढ ज़िक़्र अपना.....

10860
मिरे साज़-ए-नफ़सक़ी ख़ामुशीपर,
रूह क़हती हैं l
न आई मुझक़ो नींद और,
सो ग़या अफ़्साना-ख़्वाँ मेरा ll
                                                   इज़्तिबा रिज़वी

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