17 May 2026

10821 - 10825 दिल मोहब्बत इश्क़ बात अदा रस्म हंग़ामा तमन्ना मिज़ाज़ बज़्म वफ़ा लब ख़ामोशी शायरी


10821
उसने क़ुछ क़हाभी नहीं,
और मेरी बात हो ग़ई…
बड़ी अच्छी तरहसे उसक़ी,
ख़ामोशीसे मुलाक़ात हो ग़ई !

10822
ख़मोशीसे अदा हो रस्म-ए-दूरी,
क़ोई हंग़ामा बरपा क़्यूँ क़रें हम ll
ज़ौन एलिया

10823
अग़र मोहब्बत नहीं थी तो फक़त,
एक़ बार बताया तो होता…
ये क़म्बख़त दिल तुम्हारी ख़ामोशीक़ो,
इश्क़ समझ बैठा !!

10824
हम न मानेंग़े ख़मोशी हैं,
तमन्नाक़ा मिज़ाज़…
हाँ भरी बज़्ममें वो,
बोल न पाई होग़ी……
क़ालीदास गुप्ता रज़ा

10825
उसने क़ुछ इस तरहसे,
क़ी बेवफ़ाई…
मेरे लबोंक़ो ख़ामोशीही,
रास आई !

No comments:

Post a Comment