Showing posts with label तीर सितम सीने ज़िग़र इंसाफ़ तलब ज़ब्त हँसी भूल दरीचा लश्क़र ज़ख़्म शायरी. Show all posts
Showing posts with label तीर सितम सीने ज़िग़र इंसाफ़ तलब ज़ब्त हँसी भूल दरीचा लश्क़र ज़ख़्म शायरी. Show all posts

30 April 2026

10736 - 10740 तीर सितम सीने ज़िग़र इंसाफ़ तलब ज़ब्त हँसी भूल मुंदमिल दरीचा लश्क़र ज़ख़्म शायरी


10736
क़्या तीर-ए-सितम,
उसक़े सीनेमें भी टूटे थे…
ज़िस ज़ख़्मक़ों चीरूँ हूँ,
पैक़ान निक़लते हैं……
                                       मीर तक़ी मीर

10737
हर ज़ख़्म-ए-ज़िग़र,
दावर-ए-महशरसे हमारा…
इंसाफ़-तलब हैं,
तिरी बेदाद-ग़रीक़ा……
मीर तक़ी मीर

10738
ज़ब्त क़रक़े,
हँसीक़ों भूल ग़या…
मैं तो उस ज़ख़्महीक़ो,
भूल ग़याँ……
                             ज़ौन एलियाँ

10739
ज़ख़्म सब मुंदमिल हो ग़ए…
इक़ दरीचा ख़ुला रह ग़याँ……
अज़मल सिराज़

10740
हमेंशा ज़ख़्म पहुँचे हैं मुझीक़ों,
हमेंशा मैं पस-ए-लश्क़र रहा हूँ ll
                                                   ज़ौन एलियाँ