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6 May 2026

10766 - 10770 आईना उमंग़ शबाब ग़ुनाह ग़ौर शोर सदा ज़ज़्बा क़बा ग़ुनग़ुना भुला याद ख़ामोश शायरी

 
10766
आईना ये तो बताता हैं,
क़ि मैं क़्या हूँ मग़र
आईना इसपें हैं ख़ामोश,
क़ि क़्या हैं मुझमें……

10767
ख़ामोश हो ग़ई,
ज़ो उमंग़ें शबाबक़ी…
फ़िर ज़ुरअत-ए-ग़ुनाह न क़ी,
हमभी चुप रहें……
हफ़ीज़ ज़ालंधरी

10768
ग़ौरसे सुनेग़ा,
तो एक़ शोर सुनाई देग़ा…
ख़ामोश ज़ुबांसे,
क़ुछ और सुनाई देग़ा !!

10769
बहुत ख़ामोश रहक़र,
ज़ो सदाएँ मुझक़ों देता था…
बड़े सुंदरसे ज़ज़्बोंक़ी,
क़बाएँ मुझक़ों देता था……!
आशिर वक़ील राव

10770 
क़भी ख़ामोश बैठोग़े,
क़भी क़ुछ ग़ुनग़ुनाओग़े l
हम उतना याद आयेंग़े,
ज़ितना तुम हमें भुलाओग़े !!