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19 July 2026

11101 - 11105 दिल दुनियाँ ग़म याद क़लेज़ा आराम लब ग़ुल क़रार तड़प शायरी

 
11101
फ़िर क़िसीक़ी यादने तड़पा दिया,
फ़िर क़लेज़ा थामक़र हम रह ग़ए…!
                                                               फ़ानी बदायुनी

11102
तड़प ऐ दिल तड़पनेसे,
ज़रा आराम आता हैं l
कि लबपर हर तड़पक़े साथ,
उनका नाम आता हैं...!!!

11103
ग़ुलोंक़े सायेमें अक़्सर ‘रियाँज़’ तड़पा हूँ,
क़रार कांटोपै क़ुछ ऐसा पा लिया मैने।
                                                             ‘रियाँज़’ श्यामनग़री

11104
ख़ुद भी तड़प रहे हो,
और मुझे भी तड़पा रहे हो…
ऐसा क़्यों क़र रहे हो……? 

11105
इक़ ऐसी बहिश्त आई,
वादीमें पहुँच ज़ाएँ l
ज़िसमें क़भी दुनियाँक़े ग़म,
दिलक़ो न तड़पाएँ ll
                            अख़्तर शीरानी