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17 August 2026

11226 -11230 दिल साथ पल पल सुनसान उदास शामें बिख़रा सनम दुनियाँ बिछड़ ज़िस्म तन्हाई ज़ुदाई शायरी

 
11226
साथ बिताए वो पल,
अब बस 
 पलहैं,
तेरी ज़ुदाईसे,
घरभी अब सुनसान हैं

11227
उदास शामें ग़िनता हूँ,
तेरी तन्हाईमें l
दिल टूटक़र बिख़रा हैं,
तेरी ज़ुदाईमें ll

11228
तू मिला भी हैं... तू ज़ुदा भी हैं... तेरा क़्या क़हना...
तू सनम भी हैं... तू ख़ुदा भी हैं... तेरा क़्या क़हना…

11229
मेरी दुनियाँ तुझमेंहीं,
रूक़ी हैं क़हीं…
ज़ुदा तो हूँ पर,
बिछड़ न पायाँ क़भी……

11230
ज़िस दिनसे,
वो ज़ुदा हुआ हैं…
मैने,
ज़िस्म नहीं पहना हैं……ll