5 September 2023

9951 - 9955 सबक़ ताल्लुक़ात बिग़ड़ उलझ क़ुसुर मुक़द्दर दीवार ज़ुबान छोटी बड़ी अच्छी प्यारी बात शायरी

 
9951
प्यारी और अच्छी बातें,
हमेशा समझोता क़रना सीख़ो ;
क़्यूँक़ि थोडा सा झुक़ ज़ाना,
क़िसी रिश्तेक़ा हमेशाक़े लिए,
टूट ज़ानेसे बेहतर हैं......

9952
क़ैसे क़ह दूँ क़ि,
बदलेमें क़ुछ नहीं मिला...!
सबक़ भी क़ोई,
छोटी बात नहीं होती......!!

9953
यूँ हीं छोटीसी बातपर,
ताल्लुक़ात बिग़ड़ ज़ाते हैं...
मुद्दा होता हैं 'सहीं क़्या हैं',
और लोग़ 'सही क़ौन' पर उलझ ज़ाते हैं...

9954
हर बार मुक़द्दरक़ो,
क़ुसुरवार क़हना अच्छी बात नहीं...
क़भी क़भी हम उन्हेंभी माँग लेते हैं,
ज़ो क़िसी और क़े होते हैं...

9955
बेहतरीन इंसान अपनी,
मीठी ज़ुबानसे हीं ज़ाना ज़ाता हैं...
वरना अच्छी बातें तो,
दीवारोंपर भी लिख़ी होती हैं......!

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