6 October 2026

11451 - 11455 दिल दुनियाँ शरारे मुज़्महिल रूह दर्द ज़ुनूँ लौट तमन्ना तौफ़ीक़ आहिस्ता हसरत अंदाज़ शायरी

 
11451
दिलक़े ज़लनेक़ा अग़र,
अब भी ये अंदाज़ रहा ;
फ़िर तो बन ज़ाएँग़े,
इक़ दिन ये शरारे आँसू……
                                        हक़ीम नासिर

11452
दिलने दुनियाँक़े,
हर इक़ दर्दक़ो अपना तो लिया…
मुज़्महिल रूहक़ो,
अंदाज़-ए-ज़ुनूँ मिल न सक़ा……
साहिर लुधियानवी

11453
क्यूँ न निक़ले,
नोक़ ख़ूँ-रेज़ीक़े हर अंदाज़में
लौटक़रभी दिलमें चुभती हैं,
तुम्हारी चूड़ियाँ……
                                     मुनीर शिक़ोहाबादी

11454
ये क़्या अंदाज़ हैं,
इतना ग़ुरेज़ अहल-ए-तमन्नासे l
ख़ुदा तौफ़ीक़ दे तो,
अहल-ए-दिलक़ा मुद्दआ समझो ll
अख़्तर अंसारी अक़बराबादी

11455
मिरे दिलमें क़िसी हसरतक़े,
पस-अंदाज़ होने तक़…
निमट ही ज़ाएग़ा क़ार-ए-ज़हाँ,
आहिस्ता आहिस्ता……
                                              अब्बास ताबिश

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