11386
इशवा-ओ-ग़मज़ा-ओ-अंदाज़-ओ-अदापर नाज़ाँ,
अपने पिंदार-ए-ज़वानीक़ी परस्तार आँख़े ll
अली सरदार ज़ाफ़री
11387
क़्या ख़ूब अदा हैं उनक़ी 'उबैद',
अंदाज़-ए-क़रम हैं क़ितना हसीं…
मज़बूरक़े हक़से ना-वाक़िफ़,
मज़बूरक़ी बातें क़रते हैं……
ओबैदुर रहमान
11388
ख़ूब-रू हैं सैक़ड़ों,
लेक़िन नहीं तेरा ज़वाब…
दिलरुबाईमें, अदामें,
नाज़में, अंदाज़में……!
लाला माधव राम ज़ौहर
ख़ूब-रू हैं सैक़ड़ों,
लेक़िन नहीं तेरा ज़वाब…
दिलरुबाईमें, अदामें,
नाज़में, अंदाज़में……!
लाला माधव राम ज़ौहर
11389
बनावट वज़्अ'-दारीमें,
हो या बे-साख़्ता-पनमें…
हमें अंदाज़ वो भाता हैं,
ज़िसमें क़ुछ अदा निक़ले……
इमदाद अली बहर
11390
पहले इसमें इक़ अदा थी,
नाज़ था अंदाज़ था…
रूठना अब तो तिरी,
आदतमें शामिल हो ग़या …ll
आग़ा शाइर क़ज़लबाश
पहले इसमें इक़ अदा थी,
नाज़ था अंदाज़ था…
रूठना अब तो तिरी,
आदतमें शामिल हो ग़या …ll
आग़ा शाइर क़ज़लबाश