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4 October 2016

599 उल्फत ज़ंज़ीर डर तक़दीर ज़ुदा हाथ लकीर शायरी


599

लकीर, Line

उल्फतक़ी ज़ंज़ीरसे डर लग़ता हैं,
क़ुछ अपनी हीं तक़दीरसे डर लग़ता हैं,
ज़ो ज़ुदा क़रते हैं, क़िसीक़ो क़िसीसे,
हाथक़ी बस उसी लक़ीरसे डर लग़ता हैं l

I am afraid of the chains of love,
Some are afraid of their own fate,
Those who separate someone from someone,
I am afraid of only that line in the hand.