10311
अब ख़ाक़ उड़ रही हैं,
यहाँ इंतज़ार क़ी...
ऐ दिल ये बाम-ओ-दर,
क़िसी ज़ान-ए-ज़हाँ क़े थे ll
ज़ौन एलिया
10312
ज़िसक़ी
आँख़ोंमें क़टी थीं सदियाँ ,
उसने
सदियोंक़ी ज़ुदाई दी हैं ll
गुलज़ार
10313
इक़ उम्र क़ट ग़ई हैं,
तेरे इंतज़ारमें...
ऐसे भी हैं क़ि क़ट न सक़ी,
ज़िनसे एक़ रात......
फ़िराक़ ग़ोरख़पुरी
इक़ उम्र क़ट ग़ई हैं,
तेरे इंतज़ारमें...
ऐसे भी हैं क़ि क़ट न सक़ी,
ज़िनसे एक़ रात......
फ़िराक़ ग़ोरख़पुरी
10314
ऐसे
ही इंतज़ारमें,
लज़्ज़त
अग़र न हो...
तो
दो घड़ी फ़िराक़में,
अपनी
बसर न हो......
रियाज़
ख़ैराबादी
10315
ज़िसे न आनेक़ी,
क़स्में मैं दे क़े आया हूँ ;
उसीक़े क़दमोंक़ी आहटक़ा,
हमे इंतिज़ार भी हैं !
ज़ावेद नसीमी
ज़िसे न आनेक़ी,
क़स्में मैं दे क़े आया हूँ ;
उसीक़े क़दमोंक़ी आहटक़ा,
हमे इंतिज़ार भी हैं !
ज़ावेद नसीमी