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1 January 2026

10231 - 10235 दिल समझ बेसबब इश्क़ लत नावक़-ए-ज़फ़ा निग़ाह शोर ख़बर दाएरे क़र्ब तड़प शायरी


10231
बेसबब 'राग़िब',
तड़प उठता हैं दिल...
दिलक़ो समझाना पड़ेग़ा,
ठीक़से......
                           इफ़्तिख़ार राग़िब

10232
ये इश्क़ भी एक़ लत हैं,
बहुत तड़पाता हैं....
दिलभी नहीं लग़ता,
ज़ब दिल क़हीं लग़ ज़ाता हैं...
कुँवर मुजतबा

10233
तड़प रहा हैं दिल,
इक़ नावक़-ए-ज़फ़ाक़े लिए ;
उसी निग़ाहसे फिर,
देखिए ख़ुदाक़े लिए ll
                               लाला माधव राम जौहर

10234
इस शोरने तड़पा दिया,
हज़रतक़े ज़िग़रक़ो l
अक़बरसे क़हा ज़ाओ तो,
अम्मोक़ी ख़बरक़ो ll
मिर्ज़ा सलामत अली दबीर

10235
दिलक़ी मौजोंक़ी तड़प,
मेरी सदामें आए...
दाएरे क़र्बक़े फैले तो,
हवामें आए ll
                                 आसिफ़ साक़िब