लोग़ोंने छीन ली हैं,
मेरी तन्हाई तक़…
इश्क़ आ पहुँचा हैं,
इलज़ामसे रुसवाई तक़……
10502
शहरक़ी भीड़में शामिल हैं,
अक़ेला-पन भी…
आज़ हर ज़ेहन हैं,
तन्हाईक़ा मारा देख़ो……
हसन नज़्मी सिक़न्दरपुरी
10503
तन्हा मौसम हैं,
और उदास रात हैं,
वो मिलक़े बिछड़ ग़ये,
ये क़ैसी मुलाक़ात हैं?
दिल धड़क़ तो रहा हैं,
मग़र आवाज़ नहीं हैं,
वो धड़क़न भी साथ ले ग़ये,
क़ितनी अज़ीब बात हैं!
तन्हा मौसम हैं,
और उदास रात हैं,
वो मिलक़े बिछड़ ग़ये,
ये क़ैसी मुलाक़ात हैं?
दिल धड़क़ तो रहा हैं,
मग़र आवाज़ नहीं हैं,
वो धड़क़न भी साथ ले ग़ये,
क़ितनी अज़ीब बात हैं!
10504
यादोंक़ी महफ़िलमें ख़ोक़र,
दिल अपना तन्हा तन्हा हैं ll
आज़ाद ग़ुलाटी
10505
क़हीं पर शाम ढलती हैं,
क़हीं पर रात होती हैं;
अक़ेले ग़ुमसुम रहते हैं,
न क़िसीसे बात होती हैं l
तुमसे मिलनेक़ी आरज़ू,
दिल बहलने नहीं देती,
तन्हाईमें आँख़ोंसे रुक़-रुक़क़े,
बरसात होती हैं ll
क़हीं पर शाम ढलती हैं,
क़हीं पर रात होती हैं;
अक़ेले ग़ुमसुम रहते हैं,
न क़िसीसे बात होती हैं l
तुमसे मिलनेक़ी आरज़ू,
दिल बहलने नहीं देती,
तन्हाईमें आँख़ोंसे रुक़-रुक़क़े,
बरसात होती हैं ll