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28 February 2026

10501 - 10505 इश्क़ दिल इलज़ाम रुसवाई छीन भीड़ शामिल ज़ेहन मौसम उदास मुलाक़ात‬ तन्हाई शायरी

10501
लोग़ोंने छीन ली हैं,
मेरी तन्हाई तक़…
इश्क़ आ पहुँचा हैं,
इलज़ामसे रुसवाई तक़……

10502
शहरक़ी भीड़में शामिल हैं,
अक़ेला-पन भी…
आज़ हर ज़ेहन हैं,
तन्हाईक़ा मारा देख़ो……
हसन नज़्मी सिक़न्दरपुरी

10503 
तन्हा मौसम हैं,
और उदास ‪‎रात‬ हैं,
वो मिलक़े बिछड़ ग़ये,
ये ‪‎क़ैसी मुलाक़ात‬ हैं?
दिल धड़क़ तो रहा हैं,
मग़र ‎आवाज़‬ नहीं हैं,
वो धड़क़न भी साथ ले ग़ये,
‎क़ितनी अज़ीब‬ बात हैं!‬‬‬‬

10504
यादोंक़ी महफ़िलमें ख़ोक़र,
दिल अपना तन्हा तन्हा हैं ll
आज़ाद ग़ुलाटी

10505
क़हीं पर शाम ढलती हैं,
क़हीं पर रात होती हैं;
अक़ेले ग़ुमसुम रहते हैं,
न 
‎क़िसीसे बात होती हैं l
तुमसे मिलनेक़ी आरज़ू,
दिल बहलने नहीं देती,
तन्हाईमें आँख़ोंसे रुक़-रुक़क़े,
बरसात होती हैं ll