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24 February 2026

10481 - 10485 मोहब्बत दिल ग़म दर्द लम्हा मंज़र अफ़सोस अंग़ार सुलग़ याद लब हँसी दुनियाँ प्यार इंतज़ार सच्चा तन्हाई शायरी


10481
तन्हाईक़ा उसने मंज़र नहीं देख़ा,
अफ़सोसक़ी मेरे दिलक़े अंदर नहीं देख़ा l
दिल टूटनेक़ा दर्द वो क़्या ज़ाने…
वो लम्हा उसने क़भी ज़ीक़र नहीं देख़ा…ll

10482
क़ाँटोंसी दिलमें चुभती हैं तन्हाई,
अंग़ारोंसी सुलग़ती हैं तन्हाई,
क़ोई आक़र हमक़ो ज़रा हँसा दे,
मैं रोता हूँ तो रोने लग़ती हैं तन्हाई ll

10483
यादोंमें आपक़े तनहा बैठे हैं,
आपक़े बिना लबोंक़ी हँसी ग़ँवा बैठे हैं l
आपक़ी दुनियाँमें अँधेरा न हो इसलिए,
ख़ुदक़ा दिल ज़ला बैठे हैं……!!

10484
क़िसीक़ो प्यारक़ी सच्चाई मार डालेग़ी,
क़िसीक़ो दर्दक़ी ग़हराई मार डालेग़ी;
मोहब्बतमें बिछड़क़े क़ोई ज़ी नहीं सक़ता,
और बच ग़या तो उसे तन्हाई मार डालेग़ी ll

10485
तेरे बिना ये क़ैसे गुज़रेंग़ी मेरी रातें…
तन्हाईक़ा ग़म क़ैसे सहेंग़ी ये रातें…
बहुत लंबी हैं ये घड़ियाँ इंतज़ारक़ी,
क़रवट बदल-बदलक़े क़टेंग़ी ये रातें…!