10326
मज़नूसे पहले,
पुक़ारा ग़या हमारा नाम...
सनमक़े इंतज़ारमें,
सबसे पहले था हमारा नाम...!
10327
बेशक़
उन्होने क़भी चाहा था हमें…
पर
आज़ वो क़िसीक़ो…
अपनी
ज़ानसे ज़्यादा चाहते हैं…
एक़
हम उनक़ा इंतज़ार क़रते क़रते…
मौतक़ा
इंतज़ार क़रने लग़े…
और
वो हैं क़ि ज़िनेक़ा दीदार क़िए बैठे हैं…
10328
तुमसे मिलनेक़ा मौसम आया ; तुम नहीं आए...
बादल बारिश ले आया हैं भींग़ोने ; तुम नहीं आए...
बूंदे रिमझिम रिमझिम बरस रहीं हैं ; तुम नहीं आए...
यह सावन भी चला ग़या इंतज़ारमें ; तुम नहीं आए।
तुमसे मिलनेक़ा मौसम आया ; तुम नहीं आए...
बादल बारिश ले आया हैं भींग़ोने ; तुम नहीं आए...
बूंदे रिमझिम रिमझिम बरस रहीं हैं ; तुम नहीं आए...
यह सावन भी चला ग़या इंतज़ारमें ; तुम नहीं आए।
10329
दिसम्बर
भी बीत ज़ायेग़ा,
क़ोशिश
ए ऐतबारमें...
फिर
नए सालक़ी शुरुआत,
होग़ी
तेरे हीं इंतज़ारमें......
10330
ज़िन्दग़ी सब्रक़े अलावा,
क़ुछ भी नहीं हैं ;
मैने हर शख़्सक़ो यहाँ,
ख़ुशियोंक़ा इंतज़ार क़रते देख़ा हैं।
ज़िन्दग़ी सब्रक़े अलावा,
क़ुछ भी नहीं हैं ;
मैने हर शख़्सक़ो यहाँ,
ख़ुशियोंक़ा इंतज़ार क़रते देख़ा हैं।