1991
दिलमें भी एक बार,
उलट-पलट हो जानी चाहिए,
क्या पता नीचे दबे कुछ
अपने खास लोग मिल जाए !!
1992
हम दिखाते रहें
कश्मकश ज़िन्दगीकी...
लोग तमाशा समझकर
तालियाँ बजाते रहें...
1993
तसव्वुर, आरज़ू, यादें,
तमन्ना, शौक-ए-बेताबी;
ये सब चीजें तुम्हारी हैं,
तुम आकर छीनलो मुझसे !!!
1994
इस बज़्ममें तैगें ख़ींचीं हैं,
इस बज़्ममें साग़र तोडे हैं;
इस बज़्ममें आँख़ बिछायी हैं,
इस बज़्ममें दिल तक़ ज़ोड़े हैं !!!
1995
एहसास तो बहुत हैं उनको भी,
मेरी मोहब्बतका,
वो तड़पाते इसलिए हैं कि,
मैं और भी टूट कर चाहूं उन्हें ...!