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22 October 2026

11526 - 11530 शोख़ी आँख़ ताज़ा क़ातिल ज़ालिम बिस्मिल साथ निभा ज़माने नाराज़ आईना अंदाज़ शायरी

 
11526
तिमसालमें तेरी हैं,
वो शोख़ी क़ि ब-सद-ज़ौक़ l
आईना ब-अंदाज़-ए-ग़ुल,
आग़ोश-क़ुशा हैं ll
                                       मिर्ज़ा ग़ालिब

11527
अपना हर अंदाज़,
आँख़ोंक़ो तर-ओ-ताज़ा लग़ा…
क़ितने दिनक़े ब'अद मुझक़ो,
आईना अच्छा लग़ा……!
ज़ेहरा निग़ाह

11528
हवा-ए-सैर-ए-ग़ुल, आईना-ए-बे-मेहरी-ए-क़ातिल…
क़ि अंदाज़-ए-ब-खूं-ग़ल्तीदन-ए-बिस्मिल-पसंद आया ll
                                                                                               मिर्ज़ा ग़ालिब

11529
दोस्त बन क़रभी,
नहीं साथ निभानेवाला…
वहीं अंदाज़ हैं ज़ालिमक़ा,
ज़मानेवाला……
अहमद फ़राज़

11530
लगूँग़ा ख़ुश मग़र नाराज़ हूँ मैं l
ज़मानेक़ा नया अंदाज़ हूँ मैं ll
                                      सय्यद सरोश आसिफ़