10276
क़्या क़्या तड़प तड़पक़े,
सराफ़ील गिर पड़े...
दम आ ग़या जो सूरमें,
मुझ बेक़रारक़ा......
अहमद हुसैन माइल
10277
मैं उसक़ी ख़ास नज़रसे,
तड़प तड़प उठ्ठूँ l
वो इतने प्यारसे देख़ें,
ठहर ठहरक़े मुझे ll
अफ़रोज़ रिज़वी
10278
देता हूँ मैं इधर,
जी अपना तड़प तड़पक़र...!!
देख़ें हैं वो उधरक़ो,
आँख़ें चुरा चुराक़र......!!!
ज़ुरअत क़लंदर बख़्श
देता हूँ मैं इधर,
जी अपना तड़प तड़पक़र...!!
देख़ें हैं वो उधरक़ो,
आँख़ें चुरा चुराक़र......!!!
ज़ुरअत क़लंदर बख़्श
10279
देवे हैं ज़ान,
मुर्ग़-ए-तमन्ना तड़प तड़प l
इस पर भी उसक़ो,
लुत्फ़-ए-तमाशा न आवे हैं ll
रुस्तम नामी
10280
रोज़-ओ-शबक़े क़ोह तराशें,
रोज़क़ा ये मा'मूल हुआ...
मर मरक़र अब सुब्ह क़रेंग़े,
तड़प तड़पक़र रात हुई ll
सुलताना मेहर
रोज़-ओ-शबक़े क़ोह तराशें,
रोज़क़ा ये मा'मूल हुआ...
मर मरक़र अब सुब्ह क़रेंग़े,
तड़प तड़पक़र रात हुई ll
सुलताना मेहर