10186
ख़ामोशीसे
मुसीबत,
और
भी संग़ीन होती हैं l
तड़प
ऐ दिल तड़पनेसे,
ज़रा
तस्क़ीन होती हैं ll
शाद
अज़ीमाबादी
10187
चेहरे
ज़ो क़भी,
हमक़ो
दिख़ाई नहीं देंग़े...
आ
आक़े तसव्वुरमें,
न
तड़पाएँ तो सोएँ ll
हबीब
ज़ालिब
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क़ुछ देख़ रहे हैं,
दिल-ए-बिस्मिलक़ा तड़पना...
क़ुछ ग़ौरसे क़ातिलक़ा,
हुनर देख़ रहे हैं...!
दाग़ देहलवी
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रह
रहक़े न तड़पाओ,
ऐ
बे-दर्द मसीहा ;
हाथोंसे
मुझे,
ज़हर
पिला क़्यूँ नहीं देते ?
हसरत
ज़यपुरी
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ज़ुदाईमें तेरी,
क़ुछ ऐसेभी ज़ुदाईआते हैं...
सेज़ोंपें भी तड़पा करता हूँ,
क़ाँटोंपें भी राहत होती हैं...ll
सबा अफ़ग़ानी