Showing posts with label जीना मरना सिसक़ फ़रियाद ताक़त रूह रात चैन इंतिज़ार तड़प शायरी. Show all posts
Showing posts with label जीना मरना सिसक़ फ़रियाद ताक़त रूह रात चैन इंतिज़ार तड़प शायरी. Show all posts

12 January 2026

10271 - 10275 जीना मरना सिसक़ फ़रियाद ताक़त रूह बिज़लिय रुबाब चैन इंतिज़ार तड़प शायरी

 
10271
जीना तड़प तड़पक़र,
मरना सिसक़ सिसक़क़र...
फ़रियाद एक़ जी हैं,
क़्या क़्या ख़राबियोंमें...
                            सिराज़ औरंग़ाबादी

10272
पहुँचे तड़प तड़पक़े,
भी ज़ल्लाद तक़ न हम ;
ताक़तसे हाथ पाँव,
ज़ियादा हिला चुक़े ll
हैंदर अली आतिश

10273
क़ल्ब तड़प तड़प उठा,
रूह लरज़ लरज़ ग़ई l
बिज़लियाँ थीं भरी हुई,
ज़मज़मा-ए-रुबाबमें ll
                                असर सहबाई

10274
क़्यूँक़र तड़प तड़पक़े,
ग़ुज़ारी तमाम रात...
ये माज़रा उन्हें भी सुना लूँ,
तो चैन लूँ...
साहिर सियालक़ोटी

10275
हाँ हाँ तड़प-तड़पक़े,
ग़ुज़ारी तुम्हींने रात...
तुमने हीं इंतिज़ार क़िया,
हमने क़्या क़िया...ll
                                    दाग़ देहलवी