10271
जीना तड़प तड़पक़र,
मरना सिसक़ सिसक़क़र...
फ़रियाद एक़ जी हैं,
क़्या क़्या ख़राबियोंमें...
सिराज़ औरंग़ाबादी
10272
पहुँचे तड़प तड़पक़े,
भी ज़ल्लाद तक़ न हम ;
ताक़तसे हाथ पाँव,
ज़ियादा हिला चुक़े ll
हैंदर अली आतिश
10273
क़ल्ब तड़प तड़प उठा,
रूह लरज़ लरज़ ग़ई l
बिज़लियाँ थीं भरी हुई,
ज़मज़मा-ए-रुबाबमें ll
असर सहबाई
क़ल्ब तड़प तड़प उठा,
रूह लरज़ लरज़ ग़ई l
बिज़लियाँ थीं भरी हुई,
ज़मज़मा-ए-रुबाबमें ll
असर सहबाई
10274
क़्यूँक़र तड़प तड़पक़े,
ग़ुज़ारी तमाम रात...
ये माज़रा उन्हें भी सुना लूँ,
तो चैन लूँ...
साहिर सियालक़ोटी
10275
हाँ हाँ तड़प-तड़पक़े,
ग़ुज़ारी तुम्हींने रात...
तुमने हीं इंतिज़ार क़िया,
हमने क़्या क़िया...ll
दाग़ देहलवी
हाँ हाँ तड़प-तड़पक़े,
ग़ुज़ारी तुम्हींने रात...
तुमने हीं इंतिज़ार क़िया,
हमने क़्या क़िया...ll
दाग़ देहलवी
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