15 January 2026

10286 - 10290 दिल मोहब्बत दामन सावन बरस सख़ियाँ मिलन याद बसर अश्क़ चश्म साथ तड़प शायरी

 
10286
दामन छुड़ाक़े उनसे मैं,
ज़ाऊँ तो क़्या क़रूँ...
क़ैसे तड़प तड़पक़े,
बुलाएँ मोहब्बतें......!
                           मुसर्रत ज़बीं ज़ेबा

10287
क़्या सावन क़ैसी बरसातें,
क़्या सख़ियाँ क़्या मिलनक़ी रात...
रोता हैं दिल तड़प तड़प,
ज़ब याद पियाक़ी आती हैं......
उस्ताद वज़ाहत हुसैन ख़ाँ

10288
सुब्ह-ए-अज़लसे,
शाम-ए-अबद तक़ हैं एक़ दिन,
ये दिन तड़प तड़पक़े,
बसर क़र रहे हैं हम...
                                 रईस अमरोहवी

10289
अश्क़ आए ग़म-ए-शहसे,
ज़ो चश्म-ए-तरमें
दिल ज़लने लग़ा,
तड़प तड़पक़र बरमें...
अहमद हुसैन माइल

10290
क़भी ऐ हक़ीक़त-ए-मुंतज़र,
नज़र आ लिबास-ए-मज़ाज़में...
क़ि हज़ारों सज़्दे तड़प रहें हैं,
मिरी ज़बीन-ए-नियाज़में.....
                                        अल्लामा इक़बाल

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