10251
तड़प तड़पक़े,
दिल-ए-बेक़रार रह ज़ाए...
क़ुछ और ज़ुल्फ़-ए-सियह,
पेंच-ओ-ताब पैदा क़र !!!
ख़लीलुल हुदा शारिक़ नियाज़ी
10252
तड़प तड़पक़े,
तमन्नामें क़रवटें बदलीं ;
न पाया दिलने हमारे,
क़रार सारी रात...
इम्दाद इमाम असर
10253
तड़प तड़पक़े,
सर-ए-दार मर ग़या क़ोई...
हयात क़हिए क़ि,
मरनेही क़ा हैं इक़ अंदाज़...!
ख़ुर्शीद अलीग़
तड़प तड़पक़े,
सर-ए-दार मर ग़या क़ोई...
हयात क़हिए क़ि,
मरनेही क़ा हैं इक़ अंदाज़...!
ख़ुर्शीद अलीग़
10254
तड़प तड़पक़े,
ज़हाँ मैने ज़ान दी हैं 'सिराज़'
ख़ड़े हुए थे वहींपर,
तमाशबीन बहुत......
सिराज़ फ़ैसल ख़ान
10255
तड़प तड़पक़े भी,
ज़िसक़ी सहर न हो पाए...
मिरी ग़ज़लभी,
उसी रातक़ी अलामत हैं...!
मुख़्तार अंसारी
तड़प तड़पक़े भी,
ज़िसक़ी सहर न हो पाए...
मिरी ग़ज़लभी,
उसी रातक़ी अलामत हैं...!
मुख़्तार अंसारी
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