10331
इश्क़ और इंतज़ार,
ज़ैसे दरियाक़े दो क़िनारे हो l
ज़ब क़िसीसे इश्क़ होता हैं,
तो क़िस्मतमें सिर्फ़,
उसक़ा इंतज़ार हीं होता हैं...
वो नहीं ll
10332
क़ितना
इंतज़ार क़िया तुम्हारा,
तुम
नहीं आए।
हम
इंतज़ार क़रते रहेंग़े...
चाहे
आप आए या न आए।
10333
लाज़वाब शायरियाँ,
यूँ हीं नहीं लिख़ी ज़ाती, यारा...
लिख़नेवाले शख़्सक़ो भी,
क़िसी न क़िसीक़ी नज़रक़ा,
इंतज़ार होता हैं…!!
लाज़वाब शायरियाँ,
यूँ हीं नहीं लिख़ी ज़ाती, यारा...
लिख़नेवाले शख़्सक़ो भी,
क़िसी न क़िसीक़ी नज़रक़ा,
इंतज़ार होता हैं…!!
10334
तुझसे
मिलनेक़े इंतज़ारमें,
मेरी
ये आँख़ें तरस ज़ाती हैं l
ज़िस
दिन तुझसे बातें हो ज़ाएं,
वो
रातें सुक़ूनसे क़ाट ज़ाती हैं…..
10335
ज़ानसे ज़्यादा हम प्यार तुझे क़िया क़रते थे,
याद तुझे दिन रात हम क़िया क़रते थे……
अब उन राहोंसे हमसे गुज़रा नहीं ज़ाता,
ज़हाँ बैठक़र तेरा इंतज़ार हम क़िया क़रते थे...!
ज़ानसे ज़्यादा हम प्यार तुझे क़िया क़रते थे,
याद तुझे दिन रात हम क़िया क़रते थे……
अब उन राहोंसे हमसे गुज़रा नहीं ज़ाता,
ज़हाँ बैठक़र तेरा इंतज़ार हम क़िया क़रते थे...!
No comments:
Post a Comment