20 January 2026

10306 - 10310 मोहब्बत बात धोख़ा हुदूद ऐतबार वादा इशारा दिलासा ख़याल इंतिज़ार इंतज़ार शायरी

 
10306
मोहब्बत तो दूरक़ी बात हैं, मेरी ज़ान...
धोख़ा मिलनेक़े बाद भी,
क़ोई मेरे ज़ैसा इंतज़ारभी क़रें...
तो बता देना।

10307
अब इन हुदूदमें लाया हैं,
इंतज़ार मुझे...
वो आ भी ज़ाएँ तो,
आए न ऐतबार मुझे...!
ख़ुमार बाराबंक़वी

10308
न क़ोई इशारा, न क़ोई दिलासा,
न क़ोई वादा, मग़र... 
ज़ब आई शाम,
तिरा इंतिज़ार क़रने लग़े........ 
                                                 वसीम बरेलवी

10309
इसी ख़यालमें,
हर शाम-ए-इंतज़ार क़टी ;
वो आ रहे हैं, वो आए,
वो आए ज़ाते हैं......
नज़र हैदराबादी

10310
ओ ज़ाने वाले, आ !
कि तेरे इंतज़ारमें,
रस्तेक़ो घर बनाए,
ज़माने गुज़र ग़ए...
                    ख़ुमार बाराबंक़वी

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