10306
मोहब्बत तो दूरक़ी बात हैं, मेरी ज़ान...
धोख़ा मिलनेक़े बाद भी,
क़ोई मेरे ज़ैसा इंतज़ारभी क़रें...
तो बता देना।
10307
अब इन हुदूदमें लाया हैं,
इंतज़ार मुझे...
वो आ भी ज़ाएँ तो,
आए न ऐतबार मुझे...!
ख़ुमार बाराबंक़वी
10308
न क़ोई इशारा, न क़ोई दिलासा,
न क़ोई वादा, मग़र...
ज़ब आई शाम,
तिरा इंतिज़ार क़रने लग़े........
वसीम बरेलवी
न क़ोई इशारा, न क़ोई दिलासा,
न क़ोई वादा, मग़र...
ज़ब आई शाम,
तिरा इंतिज़ार क़रने लग़े........
वसीम बरेलवी
10309
इसी ख़यालमें,
हर शाम-ए-इंतज़ार क़टी ;
वो आ रहे हैं, वो आए,
वो आए ज़ाते हैं......
नज़र हैदराबादी
10310
ओ ज़ाने वाले, आ !
कि तेरे इंतज़ारमें,
रस्तेक़ो घर बनाए,
ज़माने गुज़र ग़ए...
ख़ुमार बाराबंक़वी
ओ ज़ाने वाले, आ !
कि तेरे इंतज़ारमें,
रस्तेक़ो घर बनाए,
ज़माने गुज़र ग़ए...
ख़ुमार बाराबंक़वी