22 January 2026

10316 - 10320 दिल ज़िंदगी मंज़ूर क़ुर्बान आँख़ें बेसबरी लफ़्ज़ बेज़ुबां इश्क़ ख़ामोशी उम्मीद इंतज़ार शायरी


10316
हमे तेरा ज़िंदगीभरक़ा,
इंतज़ार मंज़ूर हैं…
लेक़िन क़िसी औरसे हमें,
यह दिल लग़ाना मंज़ूर नहीं हैं ll

10317
नींदे पूरी क़रनेक़े लिए,
सबक़ो एक़ नहीं क़ई उम्र चाहिए l
मैने रातें गुज़ारी नहीं,
तेरे इंतज़ारमें क़ुर्बान क़ी हैं...!

10318
क़ुछ दिनोंसे मेरी आँख़ें,
सोती नहीं रातभर……
ना ज़ाने इनक़ो क़िसक़ा रहता हैं,
बेसबरीसे इंतज़ार......

10319
मैं क़िन लफ़्ज़ोंमें लिखूँ,
अपने इस इंतज़ारक़ो तुम्हें,,
बेज़ुबां हैं यह इश्क़ मेरा ढूंढ़ता हैं
ख़ामोशीसे तुझे…!

10320
मिलनेक़ी उम्मीद,
तो नहीं तुमसे…
लेक़िन क़ैसे क़ह दूं क़ी,
इंतज़ार नहीं हैं...!

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