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17 July 2026

11091 -11095 दिल तसव्वुर नक़्शा चमन क़ली ख़मोशि निक़ाल क़रार सीने तौर मंज़िल शौक़ लग़न तड़पा शायरी

 
11091
रातभर उनक़ा तसव्वुर,
दिलक़ो तड़पाता रहा ;
एक़ नक़्शा सामने,
आता रहा, ज़ाता रहा

                                अख़्तर शीरानी

11092
चमनसे क़ौन चला हैं,
ख़मोशियाँ लेक़र
क़ली क़ली तड़प उट्ठी हैं ll
सिसक़ियाँ लेक़र

11093
तड़पने फड़क़नेक़ी तौफ़ीक़ दे,
दिल-ए-मुर्तज़ा सोज़-ए-सिद्दीक़ दे……

                                                       अल्लामा इक़बाल

11094
ख़टक़ रही हैं क़ोई,
शय निक़ाल दे क़ोई……
तड़प रहा हैं,
दिल-ए-बे-क़रार सीनेमें ll
मुबारक़ अज़ीमाबादी

11095
तड़पा हैं इसी तौरसे,
दिल उसक़ी लग़नमें l
ढूँड़ी हैं यूँही शौक़ने,
आसाइश-ए-मंज़िल ll

                           फ़ैज़ अहमद फ़ैज़