2676
क़हानियोंक़ी ग़ुज़रग़ाहपरभी,
नींद नहीं ;
ये रात क़ैसी हैं
ये दर्द ज़ाग़ता क्यूँ हैं ll
2677
इंतजारकी घड़ियाँ,
ख़त्म कर ऐ
खुदा...
जिसके लिये बनाया
हैं,
उससे मिलवा भी दे
अब ज़रा...!!!
2678
वो लाख तुझे
पूजती होगी ,
मगर
तू खुश न
हो ऐ खुदा ,
वो मंदिर भी जाती
हैं तो...
मेरी
गलीसे गुजरनेके लिये...!
2679
ना हैं जिसे
मेरी फिक्र,
इत्तेफाकसे उसीको
चाह रहे हैं हम;
उसी दियेने
जलाया हाथोंको,
जिसे हवासे
बचा रहे थे
हम...
2680
शायरोंकी बस्तीमें कदम रखा
तो जाना.......
गमोंकी महफ़िल
भी
कमालकी जमती हैं.......!