10456
क़ुछ लोग़ ज़मानेमें,
ऐसे भी होते हैं l
महफ़िलमें ज़ो हंसते हैं,
तन्हाईमें रोते हैं।l
साग़र
10457
काँच ज़ैसे होते हैं,
हम ज़ैसे तन्हा लोग़ोंक़े दिल ;
क़भी टूट ज़ाते हैं,
क़भी तोड़ दिए ज़ाते हैं......
10458
तेज़ इतना हीं अग़र चलना हैं,
तन्हा ज़ाओ तुम l
बात पूरी भी न होग़ी,
और घर आ ज़ाएग़ा ll
आसिम वास्ती
तेज़ इतना हीं अग़र चलना हैं,
तन्हा ज़ाओ तुम l
बात पूरी भी न होग़ी,
और घर आ ज़ाएग़ा ll
आसिम वास्ती
10459
तन्हाईयोंमें आती रहीं,
ज़बभी उसक़ी याद...
सायासा इक़ क़रीब,
मिरे डोलता रहा......!!
ज़हींर क़ाश्मीरी
10460
मुसाफ़िर हीं मुसाफ़िर,
हर तरफ़ हैं ;
मग़र हर शख़्स,
तन्हा ज़ा रहा हैं ll
अहमद नदीम क़ासमी
मुसाफ़िर हीं मुसाफ़िर,
हर तरफ़ हैं ;
मग़र हर शख़्स,
तन्हा ज़ा रहा हैं ll
अहमद नदीम क़ासमी