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10 July 2026

10891 - 10895 दिल दुनियाँ बंदिशें इश्क़ झलक़ शौक़ विसाल बिस्मिल आँख़े क़यामत दिन रात तड़प शायरी

 
10891
बंदिशें इश्क़में,
दुनियाँसे निराली देख़े…
दिल तड़प ज़ाए मग़र,
लब न हिलाए क़ोई……
                                     आले रज़ा रज़ा

10892
बस इक़ झलक़क़ो तड़प रहीं हैं,
रहीन-ए-शौक़-ए-विसाल आँख़े…!
असरा रिज़वी

10893
हर दम तड़पक़े,
लोटता फ़िरता हूँ ख़ाक़, पर…
ग़ोया बना हूँ,
ताइर-ए-बिस्मिल तिरे बग़ैर……
                                               नादिर शाहज़हाँ पुरी

10894
ज़ो क़यामतक़ा नहीं दिन,
वो मिरा दिन क़ैसा…
ज़ो तड़पक़र न क़टी हो,
वो मिरी रात नहीं……
मुबारक़ अज़ीमाबादी

10895
यूँ अचानक़ तिरी आवाज़ क़हींसे आई,
ज़ैसे पर्बतक़ा ज़िगर चीरक़े झरना 
फ़ूटे l
या ज़मीनोंक़ी मोहब्बतमें तड़पक़र नाग़ाह,
आसमानोंसे क़ोई शोख़ सितारा टूटे ll
                                                               साहिर लुधियानवी