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20 June 2016

278 इश्क़ इत्र शराब महक़ बहक़ मिलावट शायरी


278

मिलावट, Affiliation

मिलावट हैं तेरे इश्क़में,
इत्र और शराबक़ी,
वरना हम क़भी महक़...
तो क़भी बहक़ क़्यों ज़ाते।

Your love is adulterated with,
Perfume and alcohol,
Otherwise why would I ever,
Get carried away or I smell something.