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11 January 2026

10266 - 10270 दिल ग़ोशा क़फ़स अरमाँ रिहाई ग़िला क़ातिल हौसला ख़ामोशी हाल सिसक़ि आशियाँ तड़प शायरी

 
10266
तड़प तड़पक़े हुआ,
ग़ोशा-ए-क़फ़समें तमाम...
दिल-ए-असीरमें,
अरमाँ रहा रिहाईक़ा ll
                           इनायतुल्लाह रौशन बदायूनी

10267
ग़िला क़िसे हैं क़ि,
क़ातिलने नीम-ज़ाँ छोड़ा...
तड़प तड़पक़े निक़ालूँग़ा,
हौसला दिलक़ा ll
यग़ाना चंग़ेज़ी

10268
और ग़िरक़र फ़र्शपें,
छनसे टूट ग़या तो...
तड़प तड़पक़र,
मर ज़ाएग़ी ख़ामोशी......
              मोहसिन आफ़ताब क़ेलापुरी

10269
मैं हाल अपना दोस्तो,
तुम्हें सुनाऊँ क़िस तरह...
तड़प तड़पक़े ज़ी रहा हूँ,
सिसक़ियोंक़े ज़ालमें......
यासिर ग़ुमान

10270
ज़ो मुर्ग़-ए-क़िबला-नुमा बनक़े,
आशियाँसे चले...
तड़प तड़पक़े वहीं रह ग़ए,
ज़हाँसे चले......
                                           शाद लख़नवी