11436
आलम-ए-हुस्न,
ख़ुदा-दाद-ए-बुताँ हैं क़ि ज़ो था…!
नाज़-ओ-अंदाज़,
बला-ए-दिल-ओ-जाँ हैं क़ि ज़ो था…!!
हैंदर अली आतिश
11437
दिल-ज़ूईक़ा अंदाज़ भी,
नरमी भी वहीं हैं…
सीनेपें हवा रख़ती हैं,
ज़ो हात वो तुम हो…ll
ज़िया ज़ालंधरी
11438
उसने तलवारें लग़ाईं,
ऐसे क़ुछ अंदाज़से…
दिलक़ा हर अरमाँ,
फ़िदा-ए-दस्त-ए-क़ातिल हो ग़या ll
अबुल क़लाम आज़ाद
उसने तलवारें लग़ाईं,
ऐसे क़ुछ अंदाज़से…
दिलक़ा हर अरमाँ,
फ़िदा-ए-दस्त-ए-क़ातिल हो ग़या ll
अबुल क़लाम आज़ाद
11439
दर्द क़ी लौ क़ी तरह,
प्यार क़ी ख़ुश्बू क़ी तरह…
बेवफ़ा वादोंक़ी दिलदारीक़ा,
अंदाज़ लिए……!
अली सरदार ज़ाफ़री
11440
देख़ो तो दिल-फ़रेबी-ए-अंदाज़-ए-नक़्श-ए-पा ;
मौज़-ए-ख़िराम-ए-यार भी क़्या ग़ुल क़तर ग़ई ll
मिर्ज़ा ग़ालिब
देख़ो तो दिल-फ़रेबी-ए-अंदाज़-ए-नक़्श-ए-पा ;
मौज़-ए-ख़िराम-ए-यार भी क़्या ग़ुल क़तर ग़ई ll
मिर्ज़ा ग़ालिब