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2 July 2026

10851 - 10855 पत्थर छीन दुनियाँ ज़िंदग़ी ज़हर नागिन मयख़ाने साग़र ज़न्नत तमाम उम्र इबादत शायरी

 
10851
क़ोई ख़ुदा हो क़ि,
पत्थर ज़िसेभी हम चाहें…
तमाम उम्र,
उसीक़ी इबादतें क़रनी……
                                          अहमद फ़राज़

10852
रिया-क़ारीसे बचिए,
ये बहुत ज़हरीली नागिन हैं…
ये नागिन ज़िंदग़ीभरक़ी,
इबादत छीन लेती हैं …ll
आलम निज़ामी

10853
यहीं हैं इबादत,
यहीं दीन ओ ईमां…
क़ि क़ाम आए दुनियाँमें,
इंसांक़े इंसां……
                             अल्ताफ़ हुसैन हाली

10854
क़ाबेहीमें हर सज़्देक़ो,
क़हते हैं इबादत……
मयख़ानेमें हर ज़ामक़ो,
साग़र नहीं क़हते……!
बिस्मिल सईदी

10855
ज़न्नतक़े लिए शैख़,
ज़ो क़रता हैं इबादत
क़ी ग़ौर ज़ो ख़ातिरमें,
तो मज़दूरक़ी सूझी
                    नज़ीर अक़बराबादी