Showing posts with label ग़ुज़ार तमाम हयात रुख़ शब आराम हुस्न तक़ल्लुफ़ बात दिल ज़ुल्म तड़प शायरी. Show all posts
Showing posts with label ग़ुज़ार तमाम हयात रुख़ शब आराम हुस्न तक़ल्लुफ़ बात दिल ज़ुल्म तड़प शायरी. Show all posts

14 January 2026

10281 - 10285 ग़ुज़ार तमाम रात चैन हयात रुख़ शब तक़लीफ़ आराम हुस्न बात दिल ज़ुल्म तड़प शायरी


10281
क़्यूँक़र तड़प तड़पक़े,
ग़ुज़ारी तमाम रात...
ये माज़रा उन्हें भी,
सुना लूँ तो चैन लूँ...
साहिर सियालक़ोटी

10282
मक्र-ए-हयात,
रुख़क़ी क़बा भी उतार दी ;
हमने तड़प तड़पक़े,
ये शब भी ग़ुज़ार दी ll
फ़रहान सालिम

10283
तक़लीफ़ दूर हो ग़ई,
आराम आ ग़या l
मरना तड़प तड़पक़े,
मिरा क़ाम आ ग़या ll
                                क़द्र ओरैज़ी

10284
रात तमाम हो ग़ई,
सिर्फ़ तक़ल्लुफ़ातमें...
इश्क़ तड़प तड़प उठा,
हुस्नक़ी बात बातमें......
मुस्तफ़ा हुसैन नय्यर

10285
रहता नहीं हैं रक़्ख़े,
थमता नहीं थमाए...
दिल अब तड़प तड़पक़र,
इक़ ज़ुल्म क़र रहा हैं......
                                     मीर तक़ी मीर