24 November 2025

10046 - 10050 नज़र अच्छे रंग ख़ुश्बू मौसम बहाना चेहरा पुराना दीवार ताजमहल उदास मुस्कुरा तस्वीर शायरी

 
10046
बहुतसे लोग हैं,
तस्वीरमें अच्छे बहुत अच्छे...
तेरे चेहरेपें ही मेरी नज़र,
हरदम ठहरती हैं...!
                                       उमेश मौर्य


10047
रंग ख़ुश्बू और मौसमका,
बहाना हो गया…
अपनी ही तस्वीरमें,
चेहरा पुराना हो गया ll
खालिद गनी

10048
एक कमी थी ताजमहलमें,
मैने तिरी तस्वीर लगा दी !

                                         कैफ़ भोपाली
 
10049
जो चुप-चाप रहती थी दीवारपर,
वो तस्वीर बातें बनाने लगी…!
आदिल मंसूरी
 
10050
मुझको अक्सर उदास करती हैं,
एक तस्वीर मुस्कुराती हुई…!

                                           विकास शर्मा राज़

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