2771
सुना हैं, बहोत
बारिश हैं, तुम्हारे
शहरमें,
पर ज्यादा भीगना मत...
गर धुल गई
सारी गलतफहमियॉं,
तो बहोत याद
आएंगे हम...।
2772
वो मुझसे पूछती हैं,
ख्वाब किस किसके देखते हो,
बेखबर जानती ही नहीं,
यादें उसकी सोने
कहाँ देती हैं...!
2773
ऐ ज़िंदगी.......!
मुश्किलोंके कुछ हल
दें,
बहुत थक गये
हैं,
फुर्सतके कुछ
पल दे,
दुआ हैं दिलसे सबको,
आजसे बेहतर
कल दे...!
2774
ज़ो क़भी क़ाबिल न थे...
और मंज़िले उनक़ों मिली,
ज़ो दौड़ में क़भी शामिल न थे...
2775
हम भी दरिया
हैं,
हमें अपना
हुनर मालूम हैं;
जिस तरफ़ भी
चल पड़ेगे,
रास्ता
हो जाएगा.......।