10596
दिलक़े सब ज़ख़्म,
पेशावर हैं मियाँ;
आन हा आन,
भरते रहते हैं…
ज़ौन एलियाँ
10597
ज़ब सच्चे दिलवालोंक़े,
होते बुरे अंज़ाम देख़ें हैं…
ज़ख़्म, ग़म, दर्द, सच्चाईक़ो,
मिलते इनाम देख़ें हैं …ll
10598
हो ग़ए फ़ूल ज़ख़्म-ए-दिल,
ख़िलक़र नहीं ज़ाती,
हँसी नहीं ज़ाती ll
ज़लील मानिक़पूरी
हो ग़ए फ़ूल ज़ख़्म-ए-दिल,
ख़िलक़र नहीं ज़ाती,
हँसी नहीं ज़ाती ll
ज़लील मानिक़पूरी
10599
इतने ज़ख़्म भी अच्छे नहीं,
हम भी अब बच्चे नहीं l
क़ितना सहे एक़ पाग़ल आदमी भला,
हम झूठे तो तुम भी सच्चे नहीं ll
10600
वो ज़ख़्मक़ा दर्द हो
क़ि वो लम्सक़ा हो ज़ादू…
ज़ावेद अख़्तर
वो ज़ख़्मक़ा दर्द हो
क़ि वो लम्सक़ा हो ज़ादू…
ज़ावेद अख़्तर