10236
ख़िलौनेक़ी तड़पमें,
ख़ुद ख़िलौना वो
न बन ज़ाए ;
मिरा बच्चा सड़क़पर,
रोज़ग़ारी लेक़े निक़ला
हैं ll
रऊफ़ ख़ैर
10237
सज़्दे तड़प रहें
हैं,
ज़बीन-ए-नियाज़में,
सर हैं क़िसीक़ी
ज़ुल्फ़क़ा,
सौदा लिए हुए......
अदा ज़ाफ़री
10238
दिल तड़पता हैं
फ़रियाद क़रक़े,
आँख़ ड़रती हैं
आँसू बहाक़े...
ऐसी उल्फ़तसे वो ज़ाते ज़ाते,
मुझक़ो अपनी क़सम
दे ग़ए हैं
ll
10239
ज़लती हुई ज़मींपें,
तड़पने लग़े इमाम...
बेक़सपें ज़ालिमोंने,
क़िया और इज़्दिहाम...
मीर अनीस
10240
मज़ा हैं तिरे
बिस्मिलोंक़ो तड़पमें,
तड़पमें नहीं बिस्मिलोंमें
मज़ा हैं ll
क़ैफ़ी हैंदराबादी