10451
साहिल-ए-इंतिज़ारमें तन्हा,
याद वो लहर लहर आए मुझे ll
आसिफ़ रज़ा
10452
ज़रा देर बैठे थे तन्हाईमें,
तिरी याद आँख़ें दुख़ाने लग़ी ll
आदिल मंसूरी
10453
दिलक़ी धड़क़न भी,
बड़ी चीज़़ हैं...
तन्हाईमें तेरी ख़ोई हुई,
आवाज़ सुना क़रते हैं ll
शबनम नक़वी
दिलक़ी धड़क़न भी,
बड़ी चीज़़ हैं...
तन्हाईमें तेरी ख़ोई हुई,
आवाज़ सुना क़रते हैं ll
शबनम नक़वी
10454
इक़ सफ़ीना हैं,
तिरी याद अग़र...
इक़ समुंदर हैं,
मिरी तन्हाई......!
अहमद नदीम क़ासमी
10455
अब तो उनक़ी,
यादभी आती नहीं...
क़ितनी तन्हा हो ग़ई,
तन्हाईयाँ......
फ़िराक़ ग़ोरख़पुरी
अब तो उनक़ी,
यादभी आती नहीं...
क़ितनी तन्हा हो ग़ई,
तन्हाईयाँ......
फ़िराक़ ग़ोरख़पुरी
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