20 February 2026

10461 - 10465 बज़्म दिल पासबान महफ़िल आईना बारिश चेहरे आँख़ बरस तन्हा शायरी

 
10461
बज़्ममें रहता हूँ तन्हा...
और तन्हाई बज़्म लग़ती हैं...!

10462
अच्छा हैं दिलक़े पास,
रहें पासबाने-अक़्ल,
लेक़िन क़भी-क़भी,
इसे तन्हा भी छोड़ दें।
मोहम्मद इक़बाल

10463
बस एक़ चेहरेने,
तन्हा क़र दिया हमें, वरना...
हम ख़ुदमें एक़,
महफ़िल हुआ क़रते थे...!

10464
ज़ब भी तन्हाई मिले,
आईना हैं या मैं हूँ 
उसने क़िस आनसे,
क़िस आनमें देख़ा था मुझे ?

10465
क़ोई तो बारिश ऐसी हो,
ज़ो तेरे साथ बरसे, मोसिन,
तन्हा तो मेरी आँख़ें,
हर रोज़ बरसाती हैं।

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