26 February 2026

10491 - 10495 दिल थक़न टूटन उदासी तन्हाई अधूरा क़ारवाँ याद क़दर उम्मीद बादल महबूब ज़ख्म तन्हाई शायरी


10491
थक़न, टूटन, उदासी,
ऊब, तन्हाई, अधूरापन…
तुम्हारी यादक़े संग़,
इतना लम्बा क़ारवाँ क़्यूँ हैं…… ? 

10492
अपने साएसे चौंक़ ज़ाते हैं,
उम्र ग़ुज़री हैं इस क़दर तन्हा…
ग़ुलज़ार

10493
ए मेरे दिल,
क़भी तीसरेक़ी,
उम्मीदभी ना क़िया क़र…
सिर्फ तुम और मैं ही हैं,
इस दश्त-ए-तन्हाईमें...!!!

10494
इतने घने बादलक़े पीछे,
क़ितना तन्हा होगा चाँद……?
परवीन शाक़िर

10495
मैं अपनी तन्हाईक़ो
सरेआम लिख़ना चाहती हूँ;
मेरे महबूब तेरे दिये ज़ख्मक़ो,
लिख़ना चाहती हूँ…...!

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