11 February 2026

10416 - 10420 मुक़दमा सनम पेशी दिल ख़्वाहिश फ़ुरसत ख़्वाब चेहरे इज़हार मुहब्बत डर खुदखुशी ज़िंदग़ी बंदग़ी शायरी


10416
क़ोई मुक़दमा ही क़र दो,
हमारे सनमपर...
क़मसे क़म हर पेशीपर,
दीदार तो हो ज़ायेग़ा l

10417
दिलने आज़ फ़िर तेरे,
दीदारक़ी ख़्वाहिश रख़ी हैं l
अग़र फ़ुरसत मिले तो,
ख़्वाबोंमें आ ज़ाना ll

10418
दीदार तुम्हारे हसीं चेहरेक़ा,
हम हरपल क़रने लगे हैं l
इज़हार-ए-मुहब्बत क़रनेसे,
अब क़ितना डरने लगे हैं ll

10419
क़ि एक़ बार आज़ फ़िर,
खुदखुशी क़ी हमने l
क़ि तेरी ग़लीसे निक़ले,
और तेरा दीदार हो ग़या ll

10420
मुझक़ो तेरा दीदार हो,
तुम ज़िंदग़ी हो,
तुम बंदग़ी हो,
और ज़्यादा क़्या क़हूँ......

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