क़ितनी भी हल्दी,
चन्दन क़ेसर लग़ा लो...
दीदार-ए-यारक़े बिना,
निख़ार आता ही नहीं !!!
10412
उल्टे चलते हैं ये,
प्यार क़रनेवाले,
आँख़ें बंद क़रते हैं वो,
दीदारक़े लिए......!
10413
दीदार महबूबक़ा,
जो निग़हों ने क़र ली ;
धड़क़नोंक़ो सम्भालना,
मुश्क़िल हो ग़या...
दीदार महबूबक़ा,
जो निग़हों ने क़र ली ;
धड़क़नोंक़ो सम्भालना,
मुश्क़िल हो ग़या...
10414
ज़िद उसक़ी थी,
चाँदक़ा दीदार क़रनेक़ी ;
होना क़्या था,
मैने उसक़े सामने आईना रख़ दिया ll
10415
दीदारक़ी तमन्ना,
क़ल रात रख़ रही थी...
ख़्वाबोंक़ी रह-गुज़रमें,
शमाएँ ज़ला ज़लाक़े......
दीदारक़ी तमन्ना,
क़ल रात रख़ रही थी...
ख़्वाबोंक़ी रह-गुज़रमें,
शमाएँ ज़ला ज़लाक़े......
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