10861
मेरी मसरूफ़ियतक़े हर लम्हेमें शामिल हैं...
तुम्हारी याँदें,
सोचो... मेरी फ़ुरसतोंक़ा
आलम क़्या होग़ा ...!
10862
क़ुछ लम्हे…
तुझसे बात
क़रनेक़ी हसरत हैं ! बस,
मैने क़ब
क़हा...
अपना सारा
वक़्त मुझे दे दो...!
10863
समेट लो इन नाज़ुक़ पलोंक़ो,
न ज़ाने ये लम्हे क़ल हो न हो…
हो भी ये लम्हें तो क़्या मालुम…
शामिल उन पलोंमें हम हो न हो ll
समेट लो इन नाज़ुक़ पलोंक़ो,
न ज़ाने ये लम्हे क़ल हो न हो…
हो भी ये लम्हें तो क़्या मालुम…
शामिल उन पलोंमें हम हो न हो ll
10864
वो वक़्त,
वो लम्हे, क़ुछ अज़ीब होंग़े,
दुनियाँमें
हम ख़ुशनसीब होंग़े l
दूरसे ज़ब
इतना याँद क़रते हैं आपक़ो,
क़्या होग़ा
ज़ब आप हमारे क़रीब होंग़े.!
10865
तुम्हारे एक़ लम्हेपरभी,
मेरा हक़ नहीं…
न ज़ाने तुम क़िस हक़से,
मेरे हर लम्हेमें शामिल हो!
तुम्हारे एक़ लम्हेपरभी,
मेरा हक़ नहीं…
न ज़ाने तुम क़िस हक़से,
मेरे हर लम्हेमें शामिल हो!